PANIPAT AAJKAL : निर्मला देशपांडे संस्थान के हाली अपना स्कूल में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्मदिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल के छात्रों ने स्वामी दयानंद सरस्वती के महिलाओं, दलितों तथा उपेक्षित वर्गों के प्रति किए गए महान उपकारों और योगदान को विस्तार से बताया।
महर्षि दयानंद सरस्वती ने 19वीं शताब्दी में भारतीय समाज में व्याप्त अनेक सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने बाल विवाह, सती प्रथा, पर्दा प्रथा, बहुविवाह तथा छुआछूत जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया और इनके उन्मूलन के लिए वेदों के आधार पर तर्कपूर्ण प्रचार किया। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहन दिया तथा महिलाओं को सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक समानता के अधिकारों की वकालत की। स्वामी जी ने महिलाओं की शिक्षा को अत्यंत आवश्यक माना और उन्हें वेद पढ़ने तथा यज्ञोपवीत धारण करने का अधिकार दिलाने का प्रयास किया। उनकी शिक्षाओं ने महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव रखी तथा दलितों एवं उपेक्षितों को सम्मानजनक स्थान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके ये प्रयास आज भी सामाजिक न्याय और समानता के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक राम मोहन राय ने अपने विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों प्राची सैनी, रोशनी, रिया, न्यायिका तथा आयुष ने भी स्वामी दयानंद के सामाजिक सुधारों पर प्रकाश डाला और उनके विचारों को वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिक बताया।
सभा की अध्यक्षता स्कूल की मुख्य अध्यापिका पूजा सैनी ने की। इस अवसर पर मधु यादव, कंचन डावर, रोजी चावला, सोनिया, सोनू त्यागी, सोनी यादव, ललिता राजावत, आरती दुबे तथा श्रुति जैन विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं को अपनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लिया। यह आयोजन उपेक्षित बच्चों के बीच वैदिक मूल्यों और सामाजिक सुधार की भावना को मजबूत करने में सफल रहा।